यूँ ही कभी,तन्हाई में,शाम ढले,तेरी याद में
एक उदासी सी छा जाती है
दिल कुछ बैठ सा जाता है
साथ होती है बस यादें,सुकून से बीते कुछ पल
तुम्हारी बाहों में
तब कुछ मन ही मन मुस्कुरा के
बंद पिटारी से निकाल
तेरी तस्वीर देख कर जान हम
चिराग़ों को रोशन करते है
यूँ ही कभी,तन्हाई में,शाम ढले,तेरी याद में
एक उदासी सी छा जाती है
दिल कुछ बैठ सा जाता है
साथ होती है बस यादें,सुकून से बीते कुछ पल
तुम्हारी बाहों में
तब कुछ मन ही मन मुस्कुरा के
बंद पिटारी से निकाल
तेरी तस्वीर देख कर जान हम
चिराग़ों को रोशन करते है
अंधेरो में उजाला करते है |
अंधेरो में उजाला करते है |
