जानती थी उस प्यार समेट नही पाऊंगी …. तो यूं ही तुम्से दूर भागती रही
जब मुकद्दर ने ला कर सामने खडा कर दिया
तो बेबसी पे अपनी नम आँखो से मुसकुराती रही |

जानती थी उस प्यार समेट नही पाऊंगी …. तो यूं ही तुम्से दूर भागती रही
जब मुकद्दर ने ला कर सामने खडा कर दिया
तो बेबसी पे अपनी नम आँखो से मुसकुराती रही |